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Tuesday, March 8, 2011


आँखे खुलते ही उसे नज़र आते हैं अपने बच्चे .. उन्हें खिलाना ,पिलाना ,सुपोषित संस्कृत कर मनुष्य बनाना ...


माँ ,बेटी ,बहन ,पत्नी ,सखी इन सब रिश्तो से उसका अपना व्यक्तित्व मुखरित होता हैं ,हर रिश्ता उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण ..हर रिश्ता उसके अस्तित्व की पहचान ..


बच्चो की किलबिल में वह लिखती हैं किसी अत्यंत गंभीर विषय पर कोई पुस्तक ,कभी अपनों के लिए सुपाच्य भोजन बनाते बनाते वह गुनगुनाती हैं कोई गीत ,गीत जो युगों तक हर मन में गुंजायमान रहता हैं .


खुद के लिए मिलने वाले चंद पलों में वह पढ़ती हैं पढ़ाती हैं ,सजती हैं ,सबको सवांरती हैं .कोई कविता कोई गीत ,कभी लेख कभी संगीत .कभी जग भर के सारे बच्चो बूढों को अपना मान कर करती हैं उनकी सेवा .कभी किसी बड़े पद पर आसीन हो देश की दिशा और दशा उज्जवलित करती हैं .कभी आसमानों में उड़ अपने और हर मानव के सपनो को पंख देती हैं .कभी धर्म के नियम कभी बचपन का मनचलापन सबको वह देती हैं एक आधार .वह कभी थमती नही ,हार मान कर बैठती नही .क्योकि ईश्वर ने उसे हारने के लिए नही बनाया ..वह जीत हैं .वह गीत हैं ,जीवन संगीत हैं ..इसलिए वह स्त्री हैं ..वह शक्ति हैं .


"स्त्रियाँ समस्ता सकला जगत्सु त्व्येका पूरितं मम्ब्येत" (अर्थात हे देवी दुर्गा ,अंबा जगत की स्त्रियाँ तेरा ही रूप हैं )


गर कभी कोई स्त्री उसके स्त्री होने पर दुःख जताती हैं तो मुझे सबसे ज्यादा दुःख होता हैं.....


स्त्री का जन्म लाखों जन्मो के पुण्य का फल हैं ..


मुझे स्त्री होने का अभिमानं हैं ...


संसार की सारी स्त्रियों को मेरा प्रणाम ..

Thursday, February 17, 2011

comparison between Baby bathtub And vichitra veena ?????


 मार्केट में बेबी बाथ टब देखकर आरोही ने कहा "माँ मुझे यह बाथ टब खरीदकर दो" ,मैंने कहा:" बेटा तुम्हारे पास हैं ऐसा बाथ टब ",अगली बार पुन:आरोही ने वही बात कही,मैंने भी फिर वही दोहराया .तीसरी बार फिर उसने वही बात कही ,मैंने स्वाभाविक रूप से वही दोहराया 
 
इस बार उसने प्रति उत्तर में कहा :माँ जब तुम एक ही जैसी दो दो " विचित्र वीणा " खरीद सकती हो तो मैं एक जैसे दो बाथ टब क्यों नही खरीद सकती ;-)


 .


Thursday, January 27, 2011

पहली पहली बार ...


जब कोई सफलता ,कोई चीज़ पहली बार मिलती हैं तो कितना अच्छा लगता हैं न !हम याद रखते हैं उन्हें जिन्होंने पहली बार हमारे लिए कुछ किया .हमें पहली बार कुछ नया दिया .फिर वह चाहे हमारे अपने हो  या हो अविष्कारक .
"आवश्यकता  आविष्कार की जननी " यह बचपन में सुना था ,समझा भी था ,पर कभी यह कहावत मेरे लिए भी मेरी जिंदगी का सबसे खुशनुमा सच होगी सोचा नही था .आने वाला कल पहेली बन कर रहे इसीमे जीवन की सारी सुंदरता बसी हैं ..तब मैं नही जानती थी की कभी मैं भी पहली स्त्री विचित्र वीणा वादिका कहलाउंगी.तब यह भी नही जानती थी की पापा की डांट खाकर सितार 
बजाने वाली राधिका के जीवन का सच्चा प्यार एकमात्र लक्ष्य और एक मात्र चाह संगीत ही बन जायेगा .मुझे याद हैं ,जब मेरी बहने माँ के साथ मेरे मामा ,मामी मौसी के यहाँ जाया करती थी और बाबा मुझे सितार बजाने बिठा लिया करते थे ..मुझे बड़ा गुस्सा आता था ,बहुत दुःख होता था ,लगता वो दोनों वहा कितना मजा कर रही होंगी ,सब भाई बहनों के साथ ..
पर पापा से उसी समय लिए संगीत के सबक ने मेरे जीवन की राह बदल दी ..

'My daddy strongest ' आज अरु ख़ुशी से चिल्ला चिल्ला कर यह कहती हैं तो बड़ी हँसी आती हैं साथ ही यह सच भी सामने आता हैं की हर बेटी के लिए उसके पापा एकदम हीरो होते हैं  और जब वह पापा अपनी बेटी के लिए कुछ ऐसा कर दे जो बेटी के जीवन को नयी दिशा दे ,जो आज तक किसी पापा ने अपनी बेटी के लिए नही किया हो ,तो वही पापा सुपरहीरो बन जाते हैं .
ऐसा ही कुछ मेरे पापा ने मेर लिए किया ..

जबसे विचित्र वीणा अपनाई लगा की यह वो वाद्य हैं जिस पर भारतीय संगीत की विशेषताओ को बखूबी उतारा जा सकता हैं ,पर उसका बड़ा सा आकर ,उसको लाने ले जाने में आने वाली कठिनाई ?????इसी कारण इस प्राचीन ,सुंदर और अप्रतिम वाद्य को कोई अपनाना नही चाहता .

पहली महिला विचित्र वीणा वादिका कहलाने  में गर्व होता हैं ,लेकिन 'एकमात्र 'शब्द दिल में चुभता हैं ,यही कारण था की मैंने बाबा को सहमत किया  की विचित्र वीणा को छोटा किया जाना चाहिए ,और पापा ने मेरे लिए खुद एक छोटी सी विचित्र वीणा बनाई ,एक ऐसी छोटी विचित्र वीणा जो इतिहास में अब तक किसी ने नही बनाई .मेरे इस विचार और बाबा  की बनाई वीणा को सभी कलाकरों ने बहुत सराहा ..
अच्छा लगता हैं न अपने प्रयत्नों को पहचान मिले :-)



अब दिल्ली के संजय रिखी राम जी को मैंने वैसे ही एक विचित्र वीणा बनाने का आर्डर दिया हैं मेर लिए .
 पर पहला नम्बर मेरे बाबा का :-) थेंक्स बाबा ...

Monday, December 27, 2010

एक प्यार भरी पोस्ट

कभी कभी अचानक कुछ अनुभूत होता हैं ,कहीं से कुछ आवाज आती हैं और आपका दिल कह उठता हैं बस यही तो हम चाहते हैं.


किसी को समझना जितना आसान हैं उतना ही कठिन होता हैं अपने आप को समझना अपनी खोज करना ,और कभी कभी अचानक आपको पता चलता हैं की आप यही हैं तो मन ख़ुशी से झूम उठता हैं .कुछ दिन पहले की बात मेरी एक सहेली (जिसे मैं अपनी सहेली मानती हूँ )मुझे मिली ,कुछ देर बाद वह  तो चली गयी, लेकिन मेरे मन  ने कहा "उसकी बातों का  बुरा नही लगा "शायद यही प्यार हैं .प्यार .......!!!!. 


बहुत बहुत घटनाओ के बाद सिर्फ एक बाद समझ में आती हैं वह हैं " प्यार" ...........प्यार  उनसे जो हमसे प्यार करते हैं ,"प्यार" उनसे जो हमसे नफरत करते हैं ,"प्यार" उनसे जो हमारे मित्र हैं ,"प्यार" उनसे जो हमें शत्रु मानते हैं और शायद यही  प्यार हैं जिसे मैं जानती हूँ ,मैं नही जानती की "वसुधैव कुटुम्बकम "क्या होता हैं ?बड़ी बड़ी दार्शनिक किताबे मेरे दिमाग के उपर से निकल जाती हैं?उन पोथी पत्रों को समझने की अपने जीवन में उतारने की भारी भरकम कोशिशे करके थक चुकीं हूँ,संत महात्माओ के वाक्यों को लिख लिख कर उन्हें याद करकर कर हार गयी .पर एकदिन अचानक एक बात समझ आई .वह थी  "प्यार "और लगा  अगर आप सिर्फ प्यार करते हैं ,तो आप दुनिया के सबसे खुशनसीब इंसान हैं.क्योकि सारी दुनिया को प्यार की जरुरत हैं और हमारी जरुरत हैं सबको प्यार देना. "प्यार" ख़ुशी देता हैं ,शांति देता हैं ,आत्मिक संतोष देता हैं और हो सका तो प्यार भी देता हैं .जबसे मुझे प्यार यह शब्द समझ में आया हैं तबसे कुछ और समझने की जानने की इच्छा नही रही .क्योकि बड़े बड़े भारी ग्रंथो का अध्ययन कर मैं  औरो को तो पढ़ा सकती हूँ पर खुदको पढ़ाना नामुमकिन हैं . प्यार स्वार्थ से परे होता हैं ,इच्छाओं अभिलाषाओ से उपर ...हर इंसान से चाहे वह छोटा हो बड़ा हो इंसान होने के नाते प्रेम करना जीवन को सही अर्थ और दिशा देता हैं  और ढेर सारी, सच में ढेर सारी आत्मिक शांति .......
...
मैंने सोच लिया मुझे कुछ नही करना हैं इस आने वाले नए साल में ,करना हैं तो सिर्फ प्यार ,दोस्तों से ,दुश्मनों से ,साथियों से,साथ छोड़ कर जाने वालो से ,संगीत से ,ईश्वर से ,मनुष्य से ,मनुष्यता से और स्वयं से .............


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