कहते हैं बेटी माँ की परछाई होती हैं ,वो मेरी परछाई नही ,एक दैवीय ज्योति हैं,जो जीवन को प्रकाशित करती हैं मेरा ही चेहरा,मेरी शक्ति,शांति,संगती ,गीति,आरोही ....
Wednesday, May 4, 2011
Friday, April 15, 2011
नारी शक्ति जिंदाबाद
आरोही को सुलाने की कोशिश में यह समय हो गया,बच्चे शायद भगवान का रूप होते हैं ,उन्हें पता होता हैं कब क्या करना हैं ?बिना वजह अभी तक खेलती रही,मेरे इस जागरण का फायदा यह हुआ की अभी अभी किसीने मुझे फोन करके बताया की राधिका तुम्हारी इच्छा पूरी हुई ,मैंने कहा कौनसी इच्छा ??जवाब आया तुमने कोल्हापुर मंदिर में औरतो के खिलाफ हो रहे दूर्वय्ह्वार का विरोध कर एक पत्र विधि व् न्याय विभाग को लिखा था न वही सब रोकने की इच्छा ,देखो जी न्यूज़ .मैंने झट से जी न्यूज़ लगा . खबर कुछ ऐसी हैं की "कोल्हापुर मंदिर में गर्भगृह में महिलाओ के प्रवेश पर से प्रतिबन्ध हटा "और यह संभव हुआ वहां के महिला मोर्चा के आन्दोलन के बाद .....
मैं इतनी खुश हूँ की तुरंत यह खबर आप सबको बता रही हूँ .दरअसल एक जनवरी को जब कोल्हापुर मंदिर में मैं सपरिवार गयी तो वहा महिलाओ के साथ हो रहे भेदभाव को देखकर मन एक दम दुखी हो गया .अभिषेक तो छोडिये महिलाओ को अपने पतियों के साथ बैठने की अनुमति भी नहीं दी जा रही थी ,उनसे बात करने का तरीका !!!उसके बारे में सोच कर भी मन दुखी होता हैं ,गर्भगृह तो दूर महिलाओ को मंदिर के आंतरिक परिसर में भी बैठने नहीं दिया जा रहा था,एकदम पशु सम व्ह्य्वार करके उन्हें वहां से भगाया जा रहा था .मैंने इसका विरोध किया ,पुजारियों से बात भी की ,लेकिन वो तो अपने घमंड में इतना चूर थे की क्या कहा जाये ???मंदिर से लौटकर मैंने मंदिर के सचिव से इस बारे में बात की और साथ ही इस सम्बन्ध में एक शिकायती पत्र विधि व न्याय विभाग मुंबई को भी लिख भेजा ..
मुझे ख़ुशी हैं की जो काम मैं पूरा नहीं कर पाई वह महिला मोर्चा की महिलाओ ने पूरा किया ...आज मैं पुरे दिल से कहती हूँ नारी शक्ति जिंदाबाद !!
अब मैं माँ के दर्शन को जाउंगी और अपने हाथ से माँ की पूजा करुँगी ...
जय नारी शक्ति ..
Tuesday, March 22, 2011
Tuesday, March 8, 2011
वह...................
आँखे खुलते ही उसे नज़र आते हैं अपने बच्चे .. उन्हें खिलाना ,पिलाना ,सुपोषित संस्कृत कर मनुष्य बनाना ...
माँ ,बेटी ,बहन ,पत्नी ,सखी इन सब रिश्तो से उसका अपना व्यक्तित्व मुखरित होता हैं ,हर रिश्ता उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण ..हर रिश्ता उसके अस्तित्व की पहचान ..
खुद के लिए मिलने वाले चंद पलों में वह पढ़ती हैं पढ़ाती हैं ,सजती हैं ,सबको सवांरती हैं .कोई कविता कोई गीत ,कभी लेख कभी संगीत .कभी जग भर के सारे बच्चो बूढों को अपना मान कर करती हैं उनकी सेवा .कभी किसी बड़े पद पर आसीन हो देश की दिशा और दशा उज्जवलित करती हैं .कभी आसमानों में उड़ अपने
और हर मानव के सपनो को पंख देती हैं .
कभी धर्म के नियम कभी बचपन का मनचलापन सबको वह देती हैं एक आधार
.वह कभी थमती नही ,हार मान कर बैठती नही .क्योकि ईश्वर ने उसे हारने के लिए नही बनाया ..वह जीत हैं .वह गीत हैं ,जीवन संगीत हैं ..इसलिए वह स्त्री हैं ..वह शक्ति हैं .
"स्त्रियाँ समस्ता सकला जगत्सु त्व्येका पूरितं मम्ब्येत" (अर्थात हे देवी दुर्गा ,अंबा जगत की स्त्रियाँ तेरा ही रूप हैं )
गर कभी कोई स्त्री उसके स्त्री होने पर दुःख जताती हैं तो मुझे सबसे ज्यादा दुःख होता हैं.....
स्त्री का जन्म लाखों जन्मो के पुण्य का फल हैं ..
मुझे स्त्री होने का अभिमानं हैं ...
संसार की सारी स्त्रियों को मेरा प्रणाम ...
आँखे खुलते ही उसे नज़र आते हैं अपने बच्चे .. उन्हें खिलाना ,पिलाना ,सुपोषित संस्कृत कर मनुष्य बनाना ...
माँ ,बेटी ,बहन ,पत्नी ,सखी इन सब रिश्तो से उसका अपना व्यक्तित्व मुखरित होता हैं ,हर रिश्ता उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण ..हर रिश्ता उसके अस्तित्व की पहचान ..
बच्चो की किलबिल में वह लिखती हैं किसी अत्यंत गंभीर विषय पर कोई पुस्तक ,कभी अपनों के लिए सुपाच्य भोजन बनाते बनाते वह गुनगुनाती हैं कोई गीत ,गीत जो युगों तक हर मन में गुंजायमान रहता हैं .
खुद के लिए मिलने वाले चंद पलों में वह पढ़ती हैं पढ़ाती हैं ,सजती हैं ,सबको सवांरती हैं .कोई कविता कोई गीत ,कभी लेख कभी संगीत .कभी जग भर के सारे बच्चो बूढों को अपना मान कर करती हैं उनकी सेवा .कभी किसी बड़े पद पर आसीन हो देश की दिशा और दशा उज्जवलित करती हैं .कभी आसमानों में उड़ अपने और हर मानव के सपनो को पंख देती हैं .कभी धर्म के नियम कभी बचपन का मनचलापन सबको वह देती हैं एक आधार .वह कभी थमती नही ,हार मान कर बैठती नही .क्योकि ईश्वर ने उसे हारने के लिए नही बनाया ..वह जीत हैं .वह गीत हैं ,जीवन संगीत हैं ..इसलिए वह स्त्री हैं ..वह शक्ति हैं .
"स्त्रियाँ 48समस्ता सकला जगत्सु त्व्येका पूरितं मम्ब्येत" (अर्थात हे देवी दुर्गा ,अंबा जगत की स्त्रियाँ तेरा ही रूप हैं )
गर कभी कोई स्त्री उसके स्त्री होने पर दुःख जताती हैं तो मुझे सबसे ज्यादा दुःख होता हैं.....
स्त्री का जन्म लाखों जन्मो के पुण्य का फल हैं ..
मुझे स्त्री होने का अभिमानं हैं ...
संसार की सारी स्त्रियों को मेरा प्रणाम ....
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